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Post #010 Power of Unlearning

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आज हम एक बहुत  महत्वपूर्ण टॉपिक के बारे में बात करेंगे। वह टॉपिक है लर्न, अनलर्न और रीलर्न।
आप देख रहे हैं कि आपके चारों तरफ दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। इस बदलती दुनिया में हमारे को अगर जमाने के साथ चलना है तो हमारे को अपने अंदर काफी कुछ चेंजेस लाने पड़ेंगे। इस विषय में ही हम बात करना
चाहते हैं। इस परिस्थिति को समझाने के लिए मैं एक उदाहरण लेता हूं। दो दोस्त थे उनके नाम समझाने के लिए आपको ए और बी ले लेते हैं। ए और बी दोनों एक ही कॉलोनी में रहते थे। समान उम्र के थे। उनके फैमिली का
बैकग्राउंड भी समान ही था। दोनों ही बहुत होशियार थे। अपनी लाइफ में बहुत कुछ करना चाहते थे। ए और बी ने अपनी इंजीनियरिंग करी। इसके बाद दोनों ने ही अपना बिजनेस शुरू किया। कुछ समय तक तो दोनों के बिनेस
अच्छे चलते रहे। पर कुछ दिनों बाद या कुछ सालों बाद यह महसूस हुआ कि ए तो काफी पीछे रह गए हैं और बी लगातार प्रगति करते जा रहे हैं। दिन प्रतिदिन दुगनी प्रगति करते जा रहे हैं। तो आखिर क्या कारण रहा कि जब
दोनों एक ही बैकग्राउंड के थे, एक ही सोच के थे तो हमारे ए कैंडिडेट वो तो पीछे रह गए और हमारे कैंडिडेट बी आगे चले गए। बहुत सरल सा उत्तर है इसका जो मैं आपको समझाना चाहता हूं।
हमारे साथी एक काफी रिजिड मेंटालिटी के थे। वह समय के हिसाब से अपने को बदलनानहीं चाहते थे और जो काम आज से 2 साल पहले उनको सक्सेस दे रहा था वो लगातार वैसे ही काम कर रहे थे और ये सोच रहे थे कि उनको
वैसा ही रिजल्ट लगातार मिलता रहेगा। जैसी सफलता उनको पहले मिली थी वैसी सफलता आगे भी मिलती रहेगी। वहीं हमारे दूसरे कैंडिडेट समय के हिसाब से अपने आप में परिवर्तन ला रहे थे। चेंजेस ला रहे थे और वो रूढ़िवादी मानसिकता से बाहर आ गए थे। तो जैसे-जैसे समय बदल रहा था, समय की मांग बदल रही थी, जो स्ट्रेटजीज़ उनकी पहले काम नहीं कर रही थी, जिनमें जिनसे उनको फेलियर्स मिल रही थी, वो स्ट्रेटजी छोड़ के नई स्ट्रेटजीज़ ट्राई कर रहे थे और लगातार अपने अंदर परिवर्तन कर रहे थे। लगातार समय के साथ परिवर्तन कर रहे थे। तो वो ये कहिए कि आप एक प्रकार से अनलर्न कर रहे थे। अनलर्निंग का मतलब यह नहीं है कि जो कुछ भी हमने आज तक सीखा वो सब गलत था।

अनलर्निंग का यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है। अनलर्निंग का मतलब यह है कि वो हमारी स्ट्रेटजी जो पहले काम नहीं कर रही थी और जिसके कारण हमारे को लगातार अब सफलता नहीं मिल रही है। कुछ वर्षों पहले तो वो बहुत
ज्यादा सक्सेसफुल थी। हमें सफलता भी मिल रही थी। पर बदलते परिवेश, बदलते समय के हिसाब से अब वो उतनी सक्सेसफुल नहीं रही है। तो बदलती परिस्थितियों के हिसाब से अपने आप को चेंजेस कर पाना और नई तरीके और
नई स्ट्रेटजी को अडॉप्ट करना यह अनलर्न और रीलर्न है। रीलर्न का मतलब नई तरह की चीजें सीखना है। नई तरीके सीखने का इसका एक एक रूप यह भी है कि आपने जो जैसे आप पहले काम कर रहे थे, उस तरह काम नहीं
करेंगे। आप अपने काम का तरीका बदल रहे हैं। यह है लर्न, अनलर्न और रीलर्न के बारे में। अब मैं इसके बारे में आपको और डिटेल बताना चाहता हूं। हम सभी ने Nokia टेलीफोन Nokia मोबाइल के बारे में खूब सुना होगा। पहले सभी के पास Nokia फोन हुआ करते थे। तो Nokia ने एकदम से बहुत तेजी से प्रगति करी। करीब 3- 4 साल के अंदर उन्होंने बहुत तेजी से प्रगति करी। कोई और मोबाइल फोन उनके पास में नहीं था। पर तीन-चार साल बाद अचानक ही उनकी जो प्रगति की रेट है वो धीरे-धीरे कम होने लगी। सक्सेस रेट कम होने लगी और दूसरे फ़स आगे आ गए। Samsung आ गया, iPhone आ गए। तो ऐसा क्या हुआ कि Nokia तो डाउन हो गया और Samsung और iPhone आगे आ गए। इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि Nokia ने समय के हिसाब से अपने अंदर कोई चेंजेस नहीं करे। जो उनका सॉफ्टवेयर था वो भी पुराना सॉफ्टवेयर था। उसमें कोई नए प्रकार के ऐप नहीं थे। उनका जो ऑपरेटिंग सिस्टम था वो   पुराना था और इसी बीच में हमारे पास Android फोन आ गए थे। तो Samsung ने अपना
Android फोन ले के डिफरेंट एप्स दे के काफी बढ़िया फैसिलिटीज लोगों को दी थी। यूजर फ्रेंडली हो गए थे। इसी तरह iPhone ने भी अपने अंदर चेंज किया था। जब टेलीफोन इंडस्ट्री में इतना परिवर्तन की गुंजाइश का है और उनको समय के हिसाब से परिवर्तन करना पड़ रहा है। अपने सब चीज़ों को चेंज करना पड़ रहा है। तो इसी तरह हम
ह्यूमन बीइंग्स को भी लगातार चेंज करना पड़ेगा। अपने अंदर समय के हिसाब से अगर हम परिवर्तन नहीं करेंगे तो कुछ भी चेंज नहीं होगा। एक बहुत ही पुराने दार्शनिक ने एक बात कही थी कि 21वीं सदी में वो आदमी अनपढ़ नहीं कहलाएगा जो पढ़ना लिखना नहीं जानता। 21वीं सदी में वो आदमी अनपढ़ कहलाएगा जिसने लर्न, अनलर्न और रीलर्न करना नहीं सीखा है।